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D. Pharma Degree वाले ही बन सकेंगे सरकारी फार्मासिस्ट, पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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D. Pharma Degree : पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि बिहार में फार्मासिस्ट के पद के लिए डी. फार्मा को न्यूनतम योग्यता माना जाएगा। बी. फार्मा और एम. फार्मा डिग्री धारकों की याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं।
D. Pharma Degree
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D. Pharma Degree : फार्मासिस्ट का कोर्स करने वालों के लिए यह अहम खबर है। दरअसल, फार्मासिस्ट की बहाली को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि फार्मासिस्ट के पद के लिए बिहार सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम योग्यता यानी “डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी. फार्मा)” ही मान्य होगी। यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने बी. फार्मा और एम. फार्मा डिग्रीधारकों की ओर से दायर कई याचिकाओं का निपटारा करते हुए दिया है।

साथ ही याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि बी. फार्मा/एम. फार्मा, डी. फार्मा से ऊंची योग्यता है और उन्हें आवेदन से वंचित करना अनुचित है, लेकिन कोर्ट ने माना कि डिग्री और डिप्लोमा कोर्स की प्रकृति, उद्देश्य और दायरा अलग-अलग है। आपको बता दें कि डी. फार्मा कोर्स खास तौर पर सरकारी अस्पतालों और दवा वितरण में इस्तेमाल के लिए बनाया गया है, जबकि बी. फार्मा/एम. फार्मा कोर्स औद्योगिक और अनुसंधान क्षेत्र पर आधारित है।

कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जारी नियमों को संवैधानिक मानते हुए नियमों में बदलाव होने तक खारिज कर दिया। बी फार्मा/एम फार्मा धारक तभी योग्य माने जाएंगे, जब उनके पास डी फार्मा की न्यूनतम योग्यता भी होगी। वहीं फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के 2015 रेगुलेशन में दोनों योग्यता यानी डी फार्मा/बी फार्मा को मान्यता दी गई है, लेकिन योग्यता अपने पदों की प्रकृति के अनुसार तय करने का अधिकार राज्य सरकार को है, इसलिए डी फार्मा ही मान्य होगा।

वहीं कोर्ट के इस फैसले के बाद हजारों बी फार्मा/एम फार्मा डिग्रीधारकों को बड़ा झटका लगा है, लेकिन डी फार्मा डिग्रीधारकों के लिए यह बड़ी राहत साबित हुई है। अब पटना हाईकोर्ट के फैसले पर बी फार्मा/एम फार्मा डिग्रीधारकों की क्या प्रतिक्रिया होती है? यह बड़ी बात हो सकती है। बिहार में फार्मासिस्ट पद के लिए न्यूनतम योग्यता डी फार्मा (डिप्लोमा इन फार्मेसी) मानी जाएगी बी. फार्मा और एम. फार्मा डिग्री धारकों की याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि दोनों पाठ्यक्रमों का उद्देश्य और दायरा अलग-अलग है।

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Author: News Patna Ki

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