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राहुल गांधी की रैली…खाली कुर्सियों पर दे रहे थे लाइव भाषण, लेकिन नहीं आई कोई जनता…देखिए हॉल के बाहर की असली तस्वीर

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बिहार की राजनीति: पटना में मीटिंग हॉल के बाहर खाली कुर्सियों के बीच राहुल गांधी के भाषण का लाइव प्रसारण हो रहा था. नेता प्रतिपक्ष के भाषण को सुनने के लिए एक भी दर्शक नहीं दिखा. हॉल के बाहर सभी कुर्सियां ​​खाली थीं.

Patna : राहुल गांधी आज पटना पहुंचे। वे एसकेएम हॉल में आयोजित स्वर्गीय जगलाल चौधरी जयंती समारोह में शामिल हुए। लोकसभा में विपक्ष के नेता की सभा के लिए जबरदस्त तैयारियां की गई थीं। 1800 की क्षमता वाला श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल बुक किया गया था। भीड़ अधिक होने पर सभा हॉल के बाहर से भी भाषण सुनने की व्यवस्था की गई थी।

जरूरत के हिसाब से बड़े स्क्रीन वाले टीवी लगाए गए थे, लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां ​​लगाई गई थीं। जब राहुल गांधी सभा हॉल पहुंचे तो बड़ी मुश्किल से एसकेएम हॉल भर पाया। बाहर की तो बात ही छोड़िए।

खाली कुर्सियों पर लाइव चल रहा था राहुल गांधी का भाषण

राजधानी के एसकेएम हॉल के बाहर राहुल गांधी का भाषण सुनने के लिए जो कुर्सियां ​​लगाई गई थीं, वे खाली रहीं। सामने टीवी स्क्रीन पर राहुल गांधी का भाषण लाइव प्रसारित हो रहा था, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था। टीवी के सामने रखी गई कुर्सियों में से किसी पर भी एक भी व्यक्ति नहीं बैठा था। इस तरह खाली कुर्सियों के बीच राहुल गांधी का भाषण टीवी के जरिए लाइव प्रसारित हो रहा था।

राहुल गांधी को याद नहीं आया जगलाल चौधरी का नाम

एसकेएम हॉल में आयोजित स्वर्गीय जगलाल चौधरी की जयंती समारोह में राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत की। इस दौरान उनसे एक बड़ी गलती हो गई। जिस दलित नेता की जयंती पर वे शामिल होने आए थे, उनका नाम उन्हें याद नहीं आया। राहुल गांधी ने स्वर्गीय जगलाल चौधरी को जगत चौधरी कहकर संबोधित किया। उन्होंने जगत चौधरी एक बार, दो बार और तीन बार कहा। सामने बैठे लोग दो बार चुप रहे, जैसे ही राहुल गांधी ने तीसरी बार जगत चौधरी कहा, सामने बैठे लोग जोर से चिल्लाए। यह जगत चौधरी नहीं है.. यह जगलाल चौधरी है। फिर राहुल गांधी ने संभलते हुए कहा- सॉरी। इसके बाद उन्होंने उन्हें स्वर्गीय जगलाल चौधरी कहकर संबोधित किया।

जगलाल चौधरी का जन्म 4 फरवरी 1895 को हुआ था

स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी का जन्म 5 फरवरी 1895 को सारण जिले के गड़खा प्रखंड के मीठेपुर गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1914 में पटना कॉलेज, पटना से आईएससी की परीक्षा पास की। फिर उन्होंने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया। जगलाल चौधरी जब मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में थे, तो महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने वर्ष 1921 के असहयोग आंदोलन में भी बड़ी भूमिका निभाई थी।

जगलाल चौधरी ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपने बेटे को खो दिया

19 अगस्त, 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भीड़ ने डाकघर पर हमला किया। भीड़ ने गरखा, दरौली (सीवान) और कटेया (गोपालगंज) के डाकघरों और पुलिस थानों पर हमला किया। 22 अगस्त को सेना ने आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिसमें गरखा में दो लोग शहीद हो गए। इनमें से एक जगलाल चौधरी के बेटे इंद्रदेव चौधरी थे। अगले ही दिन 23 अगस्त को वसंतपुर नामक स्थान पर पुलिस ने जगलाल चौधरी को गिरफ्तार कर लिया।

9 मई, 1975 को जगलाल चौधरी की मृत्यु हो गई

स्वतंत्रता के बाद जगलाल चौधरी ने 1952 के आम चुनाव लड़े और 1957, 1962, 1967, 1969 के चुनावों में गरखा (सारण) की आरक्षित सीट से विधानसभा के लिए चुने गए। 9 मई 1975 को उनका निधन हो गया। उनके सम्मान में भारत सरकार ने वर्ष 2000 में डाक टिकट जारी किया। 1970 में छपरा में जगलाल चौधरी कॉलेज की स्थापना की गई। 5 फरवरी 2018 को पटना के कंकड़बाग में जगलाल चौधरी की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका अनावरण किया।

..जगलाल चौधरी ने तब 5 जिलों में शराबबंदी लागू की थी

ब्रिटिश सरकार ने 1937 में प्रांतीय स्वायत्तता की बात की। तब ग्यारह भारतीय प्रांतों में चुनाव कराने का निर्णय लिया गया। चुनावों में बड़ी सफलता मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी ने बॉम्बे, मद्रास, बिहार, उड़ीसा समेत आठ प्रांतों में सरकार बनाई। 20 जुलाई 1937 को श्री कृष्ण सिंह मुख्यमंत्री बने। श्री बाबू के नेतृत्व वाली सरकार में अनुग्रह नारायण सिंह, सैयद महमूद और जगलाल चौधरी मंत्री बने। जगलाल चौधरी पहले दलित थे जो मंत्री बनने में सफल रहे। जगलाल चौधरी ने 20 जुलाई 1937 को आबकारी और लोक स्वास्थ्य विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।

आबकारी मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल संक्षिप्त लेकिन यादगार रहा। इस दौरान उन्होंने कई कठोर फैसले लिए। आबकारी मंत्री के रूप में उन्होंने 6 अप्रैल 1938 को राज्य के चुनिंदा जिलों में शराबबंदी की घोषणा की। ये जिले थे… सारण, मुजफ्फरपुर, हजारीबाग, धनबाद और रांची, जहां शराबबंदी लागू की गई। 28 नवंबर 1940 से बिहार में व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू हुआ। बिहार मंत्रिमंडल के इस्तीफे के बाद जगलाल चौधरी ने शराबबंदी का कार्यभार संभाला।

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Author: News Patna Ki

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